Folk

Kissa Hota Hai Shuru-Teesri kasam

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Song Info

Movie/Album: Teesri Kasam

Release: 1966

Music Director: Shankar Jaikishan
Lyrics
Singers: Mubarak Begum,Shankar and Shambhu

 

Lyrics in Hindi
क़िस्सी होता है शुरू
पाक इश्क़ रॅंगून
नाम अमीर दमिश्क़ के
थे एक तख्त नशीन
नेक बशर थे शाह और
रैय्यत पेर नेक नज़र थी
नेक बशर थे शाह और
रैय्यत पेर नेक नज़र थी
था एक कैफ़ अज़्द
उलफत जिसके ऊपेर थी
तहे सुल्तान सरदार एक
सुल्तानी थी
उनके नाज़ों की पाली
प्यारी लैला दुख़्तार थी
कहूँ क्या इष्क़बाज़ी का
निराला ही फसाना था
आ आ आ आ
कहूँ क्या इष्क़बाज़ी का
निराला ही फसाना था आ
ये अल्हाड़पन में वो दोनो
लड़कपन का ज़माना था
आ आ आ
आके मकटम में आपस में
ताक और झाँक रहती थी
यही था शहाल रोज़ाना का
पढ़ने का बहाना था
आ आ आ आ
दिली उलफत थी दो जानिब
ना इक तरफ़ा मोहब्बत थी
फिदा तही कैफ़ पेर लैला
वो लैला पेर दीवाना था
आ आ आ आ
अजी एक बात भी ये हैरत ए अंगेज़ थी ई ई कैसी
मिजाज़ ए कैफ़ बचपन ही से यारों आशिक़ाना था आ आ आ

मैं सुनाती हूँ इक
माजरा-ए-अजब
क़ैस तुमसे है बिल्कुल
शरम ही नहीं
है मोहब्बत बहुत कुच्छ भी
तुमसे मुझे
फ़र्क इस में तुम्हारी
कसम भी नहीं
है मोहब्बत बहुत कुच्छ ही
तुमसे मुझे आए

तेरी बांकी अदा पे
मैं खुद हूँ फिदा
अपनी चाहत का दिलबर
बयान क्या आ आ करूँ
यही ख्वाहिश है
तुम मुझको देखा करो
यही ख्वाहिश है
तुम मुझको देखा करो
और दिल-ओ- जानी
मैं तुमको देखा करूँ
यही ख्वाहिश है
तुम मुझको देखा करो ओ ओ

क्या हक़ीकत जुदाई की
ज़ाहिर करूँ
बड़ी मुझको भी जो
बेकरारी ई ई रहे
भूलती याद पल को
नहीं झूलती
मेरी आँखों में सूरत
तुम्हारी रहे
भूलती याद पल को
नहीं झूलती

एयेए एयेए एयेए एयेए एयेए एयेए एयेए एयेए
ये रब मेरी तुमसे है
माह-ए-नक़ाब
दिल लगाके ना
दिल को हटा…एयेए… लेना तुम
बेवाफ़फाई ना करना
कभी भूल कर
बेवाफ़फाई ना करना
कभी भूल कर
गर मोहब्बत करो तो
निभा देना तुम
बेवाफ़फाई ना करना
कभी भूल के आए आए

Song Trivia

It seems like there are 2 songs combined in one stage show.Mubarak Begum lends her voice to Waheeda Rehman in a very ‘Nautanki’ style.The male singers Shankar and Shambhu are well known qawwali singers.The lyricist is unknown.

Official Video

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Avid music lover and Dev Anand fan

1 Comment

  1. Saleem

    January 22, 2017 at 2:03 pm

    This is Urdu poetry and not Hindi. The writer who has produced the verse here is not familiar with Urdu language and therefore, there are errors. For instance, mah-e-laqa (moon-faced) is written as mah-e-naqab, which is ridiculous and meaningless.

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